Trump vs Pope 2026: Global Christian Backlash as Italy PM Meloni Slams Remarks
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump एक बार फिर अपने बयान को लेकर वैश्विक विवाद में घिर गए हैं। इस बार मामला धार्मिक और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील हो गया है। इस खबर के मुताबिक, ट्रंप द्वारा Pope Leo XIV पर की गई टिप्पणी ने पूरे ईसाई जगत में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है।
मामला तब गरमाया जब ट्रंप ने ईरान से जुड़े मुद्दे पर पोप के बयान को लेकर नाराजगी जताई और उन्हें “विदेश नीति के लिए खराब” करार दिया। यह बयान सामने आते ही यूरोप समेत कई देशों में राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई।
इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए ट्रंप के बयान को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया। उन्होंने कहा कि पोप का काम शांति का संदेश देना है और किसी भी युद्ध की आलोचना करना उनके पद की जिम्मेदारी का हिस्सा है।
मेलोनी ने साफ कहा कि किसी धार्मिक प्रमुख पर इस तरह की टिप्पणी न सिर्फ गलत है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिश्तों को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
इटली में ट्रंप के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। मेलोनी की सरकार के सहयोगी Matteo Salvini ने भी इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि पोप पर हमला करना न तो समझदारी है और न ही इससे कोई फायदा होने वाला है।
वहीं, इटली के विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि अमेरिका के इस बयान पर और ज्यादा सख्त प्रतिक्रिया दी जाए ताकि देश की धार्मिक भावनाओं का सम्मान बना रहे।
ट्रंप के बयान की आलोचना सिर्फ इटली तक सीमित नहीं रही, बल्कि दुनियाभर के कैथोलिक समुदाय में भी इसका विरोध देखने को मिल रहा है। कई धार्मिक विशेषज्ञों और टिप्पणीकारों ने इसे बेहद गंभीर और असामान्य बताया है।
प्रसिद्ध कैथोलिक विचारक Massimo Faggioli ने तो यहां तक कह दिया कि इतिहास में शायद ही कभी किसी नेता ने पोप पर इतने खुले और सख्त शब्दों में हमला किया हो। उनके इस बयान ने विवाद को और भी गहरा कर दिया है।
इस बीच ट्रंप ने अपने बयान से पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह पोप के “बड़े प्रशंसक नहीं” हैं और उन्हें “कमजोर” मानते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर वह व्हाइट हाउस में नहीं होते तो पोप भी वेटिकन में उस पद तक नहीं पहुंचते।
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ट्रंप के इस रुख ने वैश्विक राजनीति से जुड़े अन्य मुद्दों के बीच इस विवाद को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया है, क्योंकि इसमें धर्म और राजनीति का सीधा टकराव नजर आ रहा है।
दूसरी तरफ, पोप लियो XIV ने इस पूरे विवाद पर संयमित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि वह इस मुद्दे पर ट्रंप के साथ किसी तरह की बहस में नहीं पड़ना चाहते।
पोप ने यह भी दोहराया कि वह युद्ध के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे और शांति का संदेश देते रहेंगे। उन्होंने हाल ही में ईरान पर अमेरिका द्वारा किए गए हमलों की आलोचना भी की थी और इसे मानवता के खिलाफ बताया था।
यह पूरा विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। ऐसे में ट्रंप और पोप के बीच यह टकराव अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और धार्मिक संतुलन दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।
यूरोप में खासकर कैथोलिक समुदाय के बीच इस मुद्दे को लेकर भावनाएं काफी तीखी हो चुकी हैं और राजनीतिक नेतृत्व पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह इस पर स्पष्ट और सख्त रुख अपनाए।
