Mystery Night Creature Rescued: Asian Palm Civet Saved After Days in Tank in Korba
छत्तीसगढ़: का कोरबा जिला एक बार फिर अपनी अनोखी जैव-विविधता और इंसानियत की मिसाल पेश करने वाली घटना को लेकर चर्चा में है। इस बार कहानी है एक ऐसे “रात के मेहमान” की, जो चुपचाप गांव में आया, मुसीबत में फंसा, और फिर इंसानों की मदद से नई जिंदगी पाई।
कटघोरा वन मंडल के अंतर्गत हरदी बाजार क्षेत्र के ग्राम मुढाली में बीते कुछ दिनों से एक रहस्यमयी हलचल थी। गांव के पास बन रही एक टंकी में एक दुर्लभ जीव—Asian Palm Civet (जिसे स्थानीय भाषा में ‘बज्जू’ कहा जाता है)—गिर गया था। यह जीव आमतौर पर रात में सक्रिय रहता है, इसलिए कई दिनों तक इसकी मौजूदगी लोगों के लिए एक पहेली बनी रही।
शुरुआत में ग्रामीणों ने इंसानियत दिखाते हुए टंकी में एक सीढ़ी लगा दी, ताकि यह जीव खुद बाहर निकल सके। लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी जब वह बाहर नहीं आ पाया, तो चिंता बढ़ने लगी।

यहीं से शुरू होती है एक असली “रेस्क्यू स्टोरी”।
गांव के युवक भूपेंद्र दास ने तुरंत इस घटना की सूचना वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम “नोवा नेचर” के जितेंद्र सारथी को दी। मामला गंभीर था, इसलिए तुरंत कटघोरा के डीएफओ कुमार निशांत को भी जानकारी दी गई। उनके निर्देशन में एक स्पेशल टीम मौके के लिए रवाना की गई।
जैसे ही टीम गांव पहुंची, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। करीब एक घंटे तक चला यह अभियान आसान नहीं था—टंकी गहरी थी, जगह संकरी थी और जानवर डरा हुआ था। लेकिन टीम की सूझबूझ, धैर्य और अनुभव ने आखिरकार जीत हासिल की।
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बड़ी सावधानी के साथ Asian Palm Civet को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
जैसे ही यह सफल रेस्क्यू पूरा हुआ, वहां मौजूद ग्रामीणों और वन विभाग ने राहत की सांस ली। इसके बाद जरूरी प्रक्रिया (पंचनामा) पूरी कर इस दुर्लभ जीव को उसके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ दिया गया।
इस पूरे ऑपरेशन में कटघोरा रेंजर शुभम मिश्रा, राजू बर्मन, बबलू मारवा, बिट प्रभारी रज्जन सिंह और अन्य वनकर्मी सक्रिय रहे, साथ ही बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद थे।

क्या है खास इस जीव में?
Asian Palm Civet कोई आम जानवर नहीं है। यह एक रात्रिचर (nocturnal) जीव है, जो दिन में छिपा रहता है और रात में सक्रिय होता है। इसका खान-पान भी बेहद दिलचस्प है—फल, जामुन, कीड़े-मकोड़े, छोटे जीव और पक्षियों के अंडे तक इसका आहार होते हैं।
सबसे खास बात यह है कि यह जीव जंगलों में बीज फैलाने का काम करता है, जिससे नई वनस्पतियों का जन्म होता है। यानी यह प्रकृति के “silent helper” की तरह काम करता है।
कानूनी तौर पर भी यह बेहद महत्वपूर्ण है—Asian Palm Civet को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची–I में शामिल किया गया है, जो इसे उच्चतम सुरक्षा प्रदान करता है।
एक संदेश जो दिल छू जाए…
यह घटना सिर्फ एक रेस्क्यू नहीं, बल्कि इंसान और प्रकृति के बीच रिश्ते की एक खूबसूरत मिसाल है। जब इंसान समझदारी और दया दिखाता है, तो जंगल और जीवन दोनों सुरक्षित रहते हैं। कोरबा की यह कहानी बताती है, “कभी-कभी सबसे खामोश जीव ही हमें सबसे बड़ी सीख दे जाते हैं।”
