NASA Artemis-2 Launch Marks New Era in Moon Exploration
अमेरिकी: अंतरिक्ष एजेंसी NASA का बहुप्रतीक्षित आर्टेमिस-2 मिशन आज लॉन्च होने जा रहा है, जिसे चंद्रमा मिशनों के इतिहास में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। यह 10 दिन का मानवयुक्त मिशन होगा, जिसमें ओरियन अंतरिक्ष यान के जरिए चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के चारों ओर घुमाया जाएगा।
यह मिशन सीधे तौर पर चांद पर भविष्य में मानव लैंडिंग और स्थायी बेस बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आर्टेमिस-2, आने वाले Artemis III मिशन की तैयारी के लिए परीक्षण करेगा, जिसमें जीवन समर्थन प्रणाली और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का आकलन किया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर अब तक करीब 93 बिलियन डॉलर खर्च किए जा चुके हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्रमा केवल एक बंजर और सूखी सतह नहीं है, बल्कि वहां कई मूल्यवान संसाधन मौजूद हो सकते हैं। चांद पर ‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ यानी दुर्लभ तत्व, लोहा, टाइटेनियम और हीलियम जैसे संसाधनों की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां हमेशा छाया रहती है, जिससे वहां बर्फ के रूप में पानी मिलने की उम्मीद है।
पानी की मौजूदगी अंतरिक्ष मिशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे पीने के पानी के साथ-साथ ऑक्सीजन और हाइड्रोजन (ईंधन) भी प्राप्त किया जा सकता है। यही वजह है कि चंद्रमा को भविष्य के मंगल मिशन के लिए एक अहम पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, अंतरिक्ष में अमेरिका, चीन और रूस के बीच प्रतिस्पर्धा भी तेज हो गई है। जहां अमेरिका एक बार फिर चंद्रमा पर अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहता है, वहीं चीन भी 2030 तक इंसानों को चांद पर भेजने की तैयारी कर रहा है।
हालांकि, 1967 की ‘आउटर स्पेस ट्रीटी’ के अनुसार कोई भी देश चंद्रमा पर अपना स्वामित्व दावा नहीं कर सकता, लेकिन संसाधनों की होड़ और रणनीतिक महत्व के चलते अंतरिक्ष में वर्चस्व की यह दौड़ लगातार तेज होती जा रही है।
