China’s possible entry may escalate the West Asia crisis as US blockade in the Hormuz Strait raises global tensions.
इस्लामाबाद: Islamabad में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशें विफल होने के बाद पश्चिम एशिया का तनाव अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। Donald Trump द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर नौसैनिक नाकेबंदी के फैसले ने इस संकट को वैश्विक स्तर पर और जटिल बना दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अब केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ने की आशंका है।
इस बीच China की भूमिका को लेकर चिंता बढ़ गई है। चीन, जो ईरान से तेल का सबसे बड़ा आयातक है, इस टकराव के केंद्र में आ सकता है। चीन के रक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि उनके व्यापार और ऊर्जा समझौतों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि अमेरिका चीनी जहाजों को रोकने की कोशिश करता है, तो यह तनाव सीधे अमेरिका-चीन टकराव में बदल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन सीधे युद्ध में शामिल नहीं होगा, लेकिन वह “ग्रे जोन” रणनीति अपना सकता है। इसके तहत चीन दुर्लभ खनिजों और सेमीकंडक्टर की आपूर्ति रोककर पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था को झटका दे सकता है। साथ ही ताइवान और दक्षिण चीन सागर में सैन्य दबाव बढ़ाकर भी हालात को और जटिल बना सकता है।
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ऊर्जा के मोर्चे पर स्थिति बेहद गंभीर मानी जा रही है। चीन अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों और ईरान से पूरा करता है। ऐसे में होर्मुज में संकट गहराने का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ेगा, जिससे कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
खतरा केवल होर्मुज तक सीमित नहीं है। यमन के हूती विद्रोही बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को भी निशाना बना सकते हैं, जो लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है। इस मार्ग से दुनिया के करीब 12 प्रतिशत तेल और 10 प्रतिशत व्यापार गुजरता है। अगर यह रास्ता बाधित हुआ, तो यूरोप के लिए तेल आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
यूरोप इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आ रहा है। उसे खाड़ी से आने वाले तेल के लिए वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ेंगे। जहाजों को अफ्रीका के लंबे मार्ग से गुजरना पड़ेगा, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर भी असर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी अब केवल क्षेत्रीय रणनीति नहीं रह गई है, बल्कि यह एक संभावित वैश्विक टकराव का रूप लेती जा रही है, जिसमें ऊर्जा, व्यापार और बड़ी शक्तियां एक साथ उलझती दिख रही हैं।
