US-Iran Nuclear Talks 2026: Deal Stalls as Iran Rejects 20-Year Freeze Demand
नई दिल्ली: अमेरिका और Iran के बीच जारी तनाव और हालिया सीजफायर के बीच एक अहम कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है। JD Vance शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान की राजधानी Islamabad पहुंच गए हैं। इस दौरे को वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि जब अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की शुरुआत हुई थी, तब जेडी वेंस इस युद्ध के पक्ष में नहीं थे। अब करीब छह हफ्तों बाद वही वेंस इस्लामाबाद में मौजूद हैं और ईरान के शीर्ष नेताओं के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, ताकि उस संघर्ष को खत्म किया जा सके जिसने वैश्विक बाजारों में भी भारी उतार-चढ़ाव पैदा किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अहम वार्ता के लिए जेडी वेंस को विशेष रणनीति के तहत चुना गया है। बताया जा रहा है कि तेहरान की ओर से भी उन्हें लेकर सकारात्मक संकेत मिले थे। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के नेतृत्व के एक वर्ग ने वेंस को बातचीत में शामिल करने की इच्छा जताई थी और उन्हें एक स्वीकार्य चेहरा माना था।
सूत्रों के हवाले से यह भी सामने आया है कि ईरान में वेंस को Donald Trump के करीबी होने के बावजूद एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जो युद्ध के खिलाफ रुख रखते हैं। यही वजह है कि तेहरान को लगता है कि ट्रंप प्रशासन की ओर से बातचीत के लिए वेंस सबसे उपयुक्त और संतुलित प्रतिनिधि हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जेडी वेंस की छवि एक ऐसे नेता की है, जो सैन्य रणनीति से ज्यादा कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते हैं। उन्हें एक संभावित मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है, जो दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
ईरानी वार्ताकारों के बीच भी यह धारणा बनी हुई है कि वेंस एक समझदार और व्यवहारिक नेता हैं। उनका मानना है कि वेंस बातचीत के जरिए किसी ठोस नतीजे तक पहुंचने की कोशिश करेंगे। उनके पिछले बयानों और रुख से यह संकेत मिलता है कि वह सैन्य टकराव के बजाय शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के पक्षधर हैं।
जानकारों के मुताबिक, अगर यह शांति वार्ता सफल होती है, तो इससे न केवल क्षेत्र में स्थिरता आएगी, बल्कि जेडी वेंस की राजनीतिक स्थिति भी मजबूत होगी। माना जा रहा है कि वह 2028 में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की दौड़ में प्रमुख दावेदारों में शामिल हो सकते हैं।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस वार्ता पर टिकी हुई है, जो आने वाले दिनों में मध्य-पूर्व की दिशा और वैश्विक राजनीति दोनों को प्रभावित कर सकती है।
