ईरान तनाव के बीच नेतन्याहू का नया प्लान, होर्मुज को बायपास करने की रणनीति

ईरान: के साथ बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता गहराती जा रही है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता को लेकर। इसी बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक नई रणनीति पेश की है, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करना है। इस योजना के तहत तेल और गैस को समुद्री मार्ग के बजाय पाइपलाइन के जरिए सीधे भूमध्यसागर तक पहुंचाने की बात कही गई है।

नेतन्याहू का मानना है कि होर्मुज जैसे संवेदनशील मार्ग पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम भरी है, क्योंकि ईरान समय-समय पर इसे बाधित करने की धमकी देता रहा है, जिससे वैश्विक बाजार प्रभावित होता है। इसलिए उन्होंने तेल सप्लाई के लिए वैकल्पिक जमीनी मार्ग विकसित करने पर जोर दिया है।

प्रस्तावित योजना के अनुसार, सऊदी अरब और यूएई के तेल क्षेत्रों से पाइपलाइन के माध्यम से तेल पश्चिम दिशा में भेजा जाएगा। यह पाइपलाइन सऊदी अरब से जॉर्डन होते हुए इजराइल तक पहुंचेगी, जहां से इसे अश्केलोन या हाइफा जैसे भूमध्यसागरीय बंदरगाहों के जरिए यूरोप भेजा जा सकेगा।

इसके साथ ही सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और इजराइल की ईलाट-एश्केलोन पाइपलाइन (EAPC) को जोड़कर एक व्यापक नेटवर्क बनाने की भी योजना है, जिससे एक सुरक्षित और वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग तैयार किया जा सके।

इस रणनीति से इजराइल एक बड़े ऊर्जा ट्रांजिट हब के रूप में उभर सकता है, वहीं सऊदी अरब और यूएई की होर्मुज पर निर्भरता कम होगी। यूरोप को भी ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक स्थिर विकल्प मिल सकता है, जबकि जॉर्डन को ट्रांजिट और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का लाभ मिलेगा।

हालांकि, इस योजना के बाद भी होर्मुज का महत्व पूरी तरह खत्म नहीं होगा, लेकिन इसकी पकड़ कमजोर पड़ सकती है, जिससे क्षेत्रीय ताकत का संतुलन बदलने की संभावना जताई जा रही है।

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