Why Israel Continues Strikes in Lebanon Despite Iran Ceasefire? Explained
मध्य-पूर्व: में जारी संघर्ष के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है—जब Iran और Israel के बीच युद्धविराम लागू है, तो फिर लेबनान में इजरायली हमले क्यों नहीं रुक रहे? दरअसल, यह स्थिति पश्चिम एशिया के बेहद जटिल और बहुस्तरीय संघर्ष को दर्शाती है, जहां एक साथ कई मोर्चों पर टकराव जारी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पहली नजर में यह विरोधाभासी लग सकता है कि एक बड़े दुश्मन के साथ तनाव कम होने के बावजूद सैन्य कार्रवाई जारी है। लेकिन असल में यह अलग-अलग संघर्षों का मेल है, जिन्हें हर पक्ष अपने-अपने नजरिए से देख रहा है।
इजरायल का स्पष्ट कहना है कि ईरान के साथ हुआ सीजफायर सीमित दायरे में है और इसका लेबनान में सक्रिय Hezbollah पर कोई असर नहीं पड़ता। इजरायल के अनुसार हिज्बुल्लाह उसकी उत्तरी सीमा के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है और लगातार दबाव बनाए हुए है।
इजरायल का तर्क है कि वह हिज्बुल्लाह के सैन्य ढांचे, हथियारों और कमांड सेंटर को निशाना बनाकर उसकी भविष्य में हमले करने की क्षमता को कमजोर करना चाहता है। उसके लिए यह कार्रवाई आत्मरक्षा और ‘डिटरेंस’ की रणनीति का हिस्सा है।
दूसरी ओर, लेबनान के भीतर हालात बेहद चिंताजनक हैं। वहां के लोगों के लिए यह संघर्ष किसी रणनीतिक नीति से ज्यादा मानवीय संकट बन चुका है। राजधानी बेरूत समेत कई इलाकों में हो रहे हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिकों की जान जा रही है और हजारों लोग घायल हो चुके हैं।
स्थानीय लोगों और अधिकारियों का आरोप है कि कई हमले रिहायशी इलाकों पर किए गए, जहां कोई सैन्य ठिकाना मौजूद नहीं था। उनका कहना है कि इजरायल की कार्रवाई असंतुलित है और इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
वहीं, हिज्बुल्लाह का नजरिया इससे बिल्कुल अलग है। संगठन का कहना है कि उसने शुरुआत में ईरान के समर्थन में और बाद में इजरायल की आक्रामक कार्रवाई के जवाब में हमले किए। वह खुद को लेबनान की सुरक्षा करने वाला समूह बताता है और दावा करता है कि वह दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना को आगे बढ़ने से रोक रहा है।
हिज्बुल्लाह का यह भी कहना है कि जब ईरान के साथ युद्धविराम हुआ, तो उसमें लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इसलिए उसने अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखी।
इस पूरे घटनाक्रम में Iran की भूमिका भी बेहद अहम है। ईरान खुद को इजरायल के खिलाफ ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ का केंद्र मानता है, जिसमें हिज्बुल्लाह जैसे संगठन शामिल हैं। भले ही ईरान ने सीधे टकराव को कुछ हद तक कम किया हो, लेकिन वह अपने सहयोगी संगठनों के जरिए क्षेत्र में अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक सीमित सैन्य संघर्ष नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शक्ति संतुलन और राजनीतिक प्रभाव की लड़ाई है। यही वजह है कि सीजफायर के बावजूद लेबनान में हालात सामान्य होने के बजाय और जटिल होते जा रहे हैं।
