Intellectuals Demand Immediate End to SIR Process
New Delhi: देश के कई बुद्धिजीवियों, वकीलों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू (SIR) को तुरंत समाप्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया नागरिकों के अधिकारों के खिलाफ है और इससे मतदान का अधिकार प्रभावित हो सकता है।
यह मांग मानवाधिकार संगठन Janhastakshep द्वारा आयोजित एक सेमिनार में उठाई गई, जो Press Club of India में शनिवार को आयोजित हुआ।
सेमिनार में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त S Y Quraishi, वरिष्ठ वकील Prashant Bhushan, दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर Badri Raina और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की अध्यक्ष Sangeeta Barooah Pisharoty समेत कई प्रमुख लोग शामिल हुए।
Read Also: पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत में LPG खपत 13% घटी
सेमिनार में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें कहा गया कि देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया, खासकर West Bengal में, तुरंत रोकी जानी चाहिए। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनकी अपीलों का जल्द निपटारा किया जाए ताकि वे मतदान कर सकें, या फिर 2025 की अपडेटेड मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराए जाएं।
प्रस्ताव में चेतावनी दी गई कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव निरर्थक हो सकते हैं।
इसके अलावा यह भी कहा गया कि SIR प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए और चुनाव आयोग की भूमिका केवल मतदाता सूची में नाम जोड़ने तक सीमित होनी चाहिए। नागरिकता की जांच या प्रमाण मांगना गृह मंत्रालय का कार्य है, चुनाव आयोग का नहीं।
इस सेमिनार के संयोजक विकास बाजपेयी (JNU) और सह-संयोजक पत्रकार अनिल दुबे थे।
