Asim Munir in Tehran: Pakistan Carries US Message Amid Iran Tensions
तेहरान एयरपोर्ट पर हलचल थी…
और स्वागत करने खुद पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री।
पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर जब अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे, तो यह सिर्फ एक साधारण दौरा नहीं था—बल्कि इसके पीछे छिपा था एक बड़ा “डिप्लोमैटिक गेम”।
कहा जा रहा है कि यह डेलिगेशन सीधे अमेरिका का खास संदेश लेकर ईरान पहुंचा है।
यहीं से कहानी दिलचस्प हो जाती है…
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी के बीच पाकिस्तान अब “मध्यस्थ” की भूमिका में नजर आ रहा है। इस दौरे का मकसद आगामी शांति वार्ता को लेकर सहमति बनाना और अटके हुए मुद्दों को सुलझाना बताया जा रहा है।
लेकिन मामला इतना आसान नहीं है।
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ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि वह अपनी शर्तों से पीछे हटने वाला नहीं है।
इन शर्तों में लेबनान में युद्धविराम, जब्त संपत्तियों की वापसी और प्रतिबंधों में ढील शामिल हैं।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग ISPR के मुताबिक, इस प्रतिनिधिमंडल में गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी शामिल हैं और यह दौरा “मध्यस्थता प्रयासों” का हिस्सा है—यानी पाकिस्तान खुलकर इस पूरे खेल में एक्टिव हो चुका है।
इधर एक और ट्विस्ट सामने आया है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ खुद सऊदी अरब, तुर्की और कतर के दौरे पर निकल चुके हैं। ऐसे में इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की टाइमिंग पर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या बातचीत टल सकती है?
फिलहाल जवाब साफ नहीं है।
और इसी बीच…
ईरान ने एक बड़ी चेतावनी भी दे दी है।
ईरान के सैन्य कमांडर ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका ने अपनी नाकेबंदी नहीं हटाई, तो फारस की खाड़ी, ओमान सागर और लाल सागर में व्यापार पूरी तरह बंद किया जा सकता है।
यानी हालात सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं…
बल्कि टकराव की तरफ भी बढ़ सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या पाकिस्तान इस जटिल खेल में “ब्रिज” बनेगा… या हालात और बिगड़ेंगे?
क्योंकि इस बार दांव सिर्फ राजनीति का नहीं…
पूरे मिडिल ईस्ट की स्थिरता का है।
