Artemis II Re-entry Thrills: 40,000 km/h Speed and 2760°C Heat During Return to Earth
नई दिल्ली: अंतरिक्ष इतिहास में एक और अहम अध्याय जुड़ गया, जब Artemis II करीब 10 दिन के ऐतिहासिक सफर के बाद सफलतापूर्वक धरती पर लौट आया। यह मिशन प्रशांत महासागर में सुरक्षित स्प्लैशडाउन के साथ पूरा हुआ। हालांकि वापसी के दौरान कुछ मिनटों के लिए संपर्क टूटने से मिशन कंट्रोल में चिंता का माहौल बन गया था, लेकिन जैसे ही कमांडर Reid Wiseman की आवाज सुनाई दी, सभी ने राहत की सांस ली।
इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल थे—Christina Koch, Victor Glover, Jeremy Hansen और रीड वाइजमैन। यह पांच दशकों में पहला ऐसा मिशन रहा, जिसमें इंसानों ने चांद के पास से उड़ान भरी। इसे भविष्य में चांद पर स्थायी ठिकाना बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
री-एंट्री बना सबसे बड़ा इम्तिहान
मिशन के शुरुआती नौ दिन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन दसवें दिन सबसे बड़ा खतरा सामने आया। पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते समय कैप्सूल की रफ्तार करीब 40,000 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई, जबकि तापमान 2760 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा।
इस दौरान कैप्सूल के चारों ओर आग जैसी तपती प्लाज्मा परत बन गई, जिससे लगभग 6 मिनट तक पृथ्वी से संपर्क पूरी तरह टूट गया। यह समय मिशन का सबसे तनावपूर्ण पल था। लेकिन हीट शील्ड ने पूरी तरह सही काम किया, पैराशूट समय पर खुले और जैसे ही संपर्क बहाल हुआ, मिशन कंट्रोल में तालियों की गूंज सुनाई दी।
इतिहास रचने वाला दल
इस मिशन की एक बड़ी खासियत इसकी विविधता भी रही। क्रिस्टिना कोच चांद मिशन के लिए चयनित पहली महिला बनीं, विक्टर ग्लोवर पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री बने और जेरेमी हैंसन चांद मिशन पर जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री बने।
यह दल Apollo 13 से भी ज्यादा दूरी तक पहुंचा। अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से करीब 4,06,771 किलोमीटर दूर गए और चांद के उस हिस्से को देखा, जिसे अब तक केवल रोबोटिक मिशन ही देख पाए थे।
अंतरिक्ष से दिखे अद्भुत नजारे
मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने हजारों तस्वीरें कैद कीं। इनमें ‘अर्थसेट’ नाम की एक खास तस्वीर भी शामिल है, जिसमें चांद की सतह के पीछे से धरती नजर आती है। इसके अलावा उन्होंने अंतरिक्ष से सूर्य ग्रहण, उल्कापिंडों की चमक और चांद के अंधेरे हिस्से को भी देखा, जो उनके लिए बेहद यादगार अनुभव रहा।
मिशन के दौरान एक भावुक क्षण भी सामने आया, जब अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद के दो गड्ढों का नाम अपने यान और एक सदस्य की दिवंगत पत्नी के नाम पर रखने की अनुमति मांगी।
मिशन की बड़ी उपलब्धियां
इस मिशन ने चांद पर इंसानों की वापसी की दिशा में नई राह खोली है। इसमें यान के कई अहम सिस्टम जैसे लाइफ सपोर्ट, नेविगेशन और प्रोपल्शन का सफल परीक्षण किया गया। हालांकि कुछ तकनीकी चुनौतियां भी सामने आईं, जिनमें टॉयलेट सिस्टम में खराबी और पानी व ईंधन सिस्टम के वाल्व से जुड़ी समस्याएं शामिल थीं।
फिलहाल, इस मिशन की सफलता को भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए एक मजबूत नींव माना जा रहा है और अब दुनिया की नजर अगले कदम पर टिकी है।
