What is the Strait of Hormuz? Why Iran’s Statement Has Increased Tensions | Full Details
तेहरान/नई दिल्ली: Strait of Hormuz को लेकर ईरान ने बड़ा बयान दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। ईरान के वरिष्ठ राजनयिक सईद खतीबज़ादेह ने कहा है कि अगर अमेरिका हमले बंद कर देता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोल दिया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना चाहता है, लेकिन मौजूदा हालात में यह तभी संभव है जब क्षेत्र में तनाव कम हो। उनका कहना था कि अमेरिका द्वारा युद्ध शुरू करने से पहले यह जलमार्ग सदियों से खुला हुआ था।
ईरान ने यह भी कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करता है, लेकिन होर्मुज पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र नहीं है। इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा काफी हद तक ईरान और ओमान की नीतियों पर निर्भर करती है। साथ ही ईरान ने चेतावनी दी कि खाड़ी क्षेत्र का युद्धपोतों द्वारा दुरुपयोग स्वीकार नहीं किया जाएगा।
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। अपने सबसे संकरे हिस्से में यह करीब 33 किलोमीटर चौड़ा है और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है।
क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
दुनिया के लगभग 20% तेल और एलएनजी (LNG) का परिवहन इसी मार्ग से होता है। U.S. Energy Information Administration के अनुसार, हर दिन करोड़ों बैरल तेल इस रास्ते से गुजरता है, जिसकी कुल कीमत सैकड़ों अरब डॉलर सालाना होती है।
यह तेल सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि इराक, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से भी वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है।
कहां जाता है यह तेल?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जलमार्ग से गुजरने वाले करीब 80% से ज्यादा तेल की सप्लाई एशियाई देशों—खासतौर पर चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया—को जाती है। चीन अकेले ही ईरान के बड़े हिस्से का तेल खरीदता है।
क्यों मचा है बवाल?
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर संकट गहराता जा रहा है। हालात बिगड़ने के बाद यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में कमी आई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
निष्कर्ष:
होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की धुरी है। यहां बढ़ता तनाव दुनिया भर में तेल की कीमतों और सप्लाई को सीधे प्रभावित कर सकता है।
