Iran Rejects Trump Deadline Deal—Hormuz Won’t Open for Temporary Ceasefire
अमेरिका: और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं, लेकिन हालात अब भी बेहद नाजुक बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की तय डेडलाइन करीब आते ही युद्धविराम को लेकर कई प्रस्ताव सामने आए हैं, मगर अब तक किसी पर सहमति नहीं बन पाई है।
मिस्त्र, पाकिस्तान और तुर्किये की मध्यस्थता में करीब 45 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें इस दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत करने की बात कही गई है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का सुझाव भी दिया गया है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी तक किसी पक्ष ने औपचारिक मंजूरी नहीं दी है।
दूसरी ओर, पाकिस्तान की तरफ से एक अलग प्रस्ताव भी सामने आया है, जिसमें तत्काल युद्धविराम के बाद 15 से 20 दिनों के भीतर व्यापक शांति समझौते की रूपरेखा तैयार करने की बात कही गई है।
इस बीच व्हाइट हाउस ने माना है कि ट्रंप के सामने कई विकल्प हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक किसी एक प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी नहीं दी है।
ईरान ने साफ तौर पर कह दिया है कि वह अस्थायी युद्धविराम के बदले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए तैयार नहीं है। तेहरान का कहना है कि उसे अमेरिका की मंशा पर भरोसा नहीं है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर हमले जारी रहे तो बाब-अल-मंदेब जैसे अन्य अहम समुद्री रास्तों को भी बंद किया जा सकता है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ेगा।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि उनकी शर्तें मध्यस्थ देशों को भेज दी गई हैं, लेकिन दबाव और धमकी के बीच कोई बातचीत स्वीकार नहीं की जाएगी।
वहीं, इजरायल ने भी ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने दावा किया है कि हालिया हमलों में ईरान के दो वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को मार गिराया गया है।
इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स पेट्रोकेमिकल क्षेत्र पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने भी पलटवार जारी रखा है। इस संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में आम नागरिक भी शामिल हैं।
उधर, ट्रंप ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि अगर तय समय तक समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा और नागरिक ढांचे पर बड़े हमले कर सकता है।
कुल मिलाकर, हालात ऐसे मोड़ पर पहुंच चुके हैं जहां एक तरफ बातचीत की कोशिशें जारी हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
