Iranian Missiles Linked to North Korean Tech, Raises Alarm in Israel Conflict
तेहरान। इजरायल और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपनी मिसाइल ताकत का खुलकर प्रदर्शन किया है। इस बीच रक्षा विशेषज्ञों ने दावा किया है कि ईरान की कई मिसाइलों में उत्तर कोरिया की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने हाल के हमलों में खाड़ी देशों, इजरायल और यहां तक कि अमेरिका के ठिकानों को भी निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि हिंद महासागर में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया की ओर भी मिसाइल दागी गई, जिसे एक्सपर्ट्स उत्तर कोरिया की ‘मुसुदान’ मिसाइल से जोड़कर देख रहे हैं। यह मिसाइल मूल रूप से उत्तर कोरिया द्वारा विकसित की गई है।
जानकारी के अनुसार, ईरान ने साल 2005 में उत्तर कोरिया से इस तरह की करीब 19 मिसाइलें खरीदी थीं। इससे पहले 1990 के दशक में भी ईरान ने ‘नो डोंग’ मिसाइलें हासिल की थीं, जिनकी तकनीक पर बाद में उसने अपने देश में काम किया। इसी आधार पर ईरान ने ‘इमाद’ और ‘कादर’ जैसी मिसाइलों का विकास किया।
रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि ईरान के पास फिलहाल करीब 1,000 किलोमीटर तक मार करने वाली शॉर्ट रेंज और 3,000 किलोमीटर तक पहुंचने वाली मीडियम रेंज मिसाइलें मौजूद हैं, जबकि लंबी दूरी की मिसाइल तकनीक पर काम जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और उत्तर कोरिया के बीच रक्षा सहयोग कोई नया नहीं है, बल्कि यह कई दशकों से चला आ रहा है। इस सहयोग के तहत उत्तर कोरिया जहां हथियार और तकनीक उपलब्ध कराता है, वहीं ईरान बदले में तेल की आपूर्ति करता है।
अमेरिकी विशेषज्ञों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों में जिन बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ, वे ‘क्यूआईएएम’ सिस्टम पर आधारित हो सकती हैं, जिसे उत्तर कोरिया की मदद से विकसित किया गया है। वहीं ईरान की ‘शाहब-3’ मिसाइल को भी उत्तर कोरिया की ‘नो डोंग’ मिसाइल से काफी मिलता-जुलता बताया जा रहा है।
